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राजस्थान कृषि उपज मण्डी विधेयक 2020 ध्वनिमत से पारित
February 19, 2020 • छोटा अखबार • राज्य

राजस्थान कृषि उपज मण्डी विधेयक 2020 ध्वनिमत से पारित

छोटा अखबार।
राज्य विधानसभा ने मंगलवार को विधानसभा में राजस्थान कृषि उपज मण्डी (संशोधन) विधेयक, 2020 ध्वनिमत से पारित कर दिया है। संसदीय कार्य मंत्री शांति कुमार धारीवाल ने सदन में विधेयक प्रस्तुत किया। उन्होंने विधेयक को सदन में लाने के कारणों एवं उद्देश्यों को रेखांकित करते हुए बताया कि मुख्यमंत्री ने 2019-20 के बजट में किसानों के लिए ईज ऑफ डूइंग बिजनस की तर्ज पर ईज ऑफ डूइंग फार्मिंग की ओर बड़ा कदम उठाते हुए एक हजार करोड़ रुपए के कृषक कल्याण कोष बनाने की घोषणा की थी। उन्होंने इस कोष में एक हजार करोड़ रुपए और डालने की घोषणा की। श्री धारीवाल ने बताया कि पूर्ववर्ती किसान कल्याण कोष में मुख्यतः उत्पादन से विपणन तक पोस्ट हार्वेस्ट मैनेजमेंट (पीएचएम) गतिविधियों का समावेश था, जबकि नए कृषक कल्याण कोष में पुरानी गतिविधियों के साथ कई नई महत्वपूर्ण गतिविधियां शामिल की गई हैं।


धारीवाल ने बताया कि नए कोष में कृषि प्रसंस्करण, कृषि व्यवसाय, कृषि निर्यात प्रोत्साहन के साथ किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद के लिए प्रोम्प्ट पेमेंट की व्यवस्था की गई है। उन्होंने बताया कि यदि किसान की फसल का बाजार भाव गिर जाता है तो बाजार हस्तक्षेप योजना लागू करके किसानों को हानि से बचाने के लिए खरीद की व्यवस्था की गई है। किसानों को उनकी उपज का भाव कम होने पर जबरदस्ती बेचने से बचाने के लिए तथा उनकी धन की आवश्यकता को पूरा करने के लिए उनकी फसल को गिरवी रखकर ऋण की व्यवस्था करने का प्रावधान किया गया है। इस कृषक कल्याण कोष से उपलब्ध होने वाली राशि से किसानों के कल्याण से संबंधित अन्य कार्य और स्कीमों को लागू किया जाएगा। इस अध्यादेश को गत 16 दिसम्बर को इसलिए जारी किया गया ताकि कृषक कल्याण की विभिन्न योजनाओं की क्रियान्विति की जा सके एवं पूर्ववर्ती किसान कल्याण कोष में वर्णित वित्तीय प्रावधानों के अतिरिक्त किन्हीं अन्य स्रोतों से भी निधि की व्यवस्था हो सके। इसके लिए बैंक से एक हजार करोड़ रुपए का ऋण लिया गया। उसमें से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अन्तर्गत राज्यांश प्रीमियम राशि के भुगतान के लिए 500 करोड़ रुपए की स्वीकृति प्रदान की गई है। इसके अतिरिक्त 2018-19 के दौरान जिन डिग्गीयों का निर्माण कार्य लम्बित था, जिसका दायित्व भी हम पर छोड़ गए थे। उसके भुगतान के लिए 116 करोड़ रुपए दिए जाने की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। इसमें से केन्द्र सरकार से 58.50 करोड़ की राशि आनी थी, जो अभी तक प्राप्त नहीं हुई है। इससे पहले सदन ने विधयक को जनमत जानने के लिए परिचालित करने के संशोधन प्रस्ताव को ध्वनिमत से अस्वीकार कर दिया।