ALL राजनीति खेल अपराध मनोरंजन कृषि विज्ञान राज्य योजनाएं धर्म देश - विदेश
राजनीतिक गलियारों में बकवासों की बरसात
July 12, 2020 • छोटा अखबार • राज्य

राजनीतिक गलियारों में बकवासों की बरसात

अनिल त्रिवेदी

छोटा अखबार।

प्रदेश में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के लिये मंत्रिमंडल का विस्तार जी का जंजाल बन गया है। पहले मंत्रिमंडल विस्तार में देरी हुई और उसके बाद अब फिर से कई राजनीतिक कयास लगाए जा रहे है। 
इसकी वजह सचिन पायलेट बताए जा रहे हैं जिनके बारे में कहा जा रहा है कि वो अपने करीबियों को मलाईदार विभाग दिलवाना चाहते हैं। प्रदेश में अफवाओं का बाजार गर्म है। कई समाचार चेनल अपनी टीआरपी बढ़ानें के चक्कर में जनता गुमराह कर रहे है, वहीं राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा हो गई है।

मंत्रिमंडल को लेकर खींचतान ऐसी है कि अपने खेमें के लोगों को मंत्री बनाने और शपथ दिलाने में उतावले हो रहे है। मसले का हल निकालने के लिये दिल्ली तक दौड़ लगा रहे है। रातों की नींद हराम हो रही है। वहां कुछ दिन और घंटो का प्रवास कर वापस जयपुर की ओर लौट रहे है, मगर हल निकलता नजर नहीं आ रहा है। लगातार यही कहा जा रहा है कि मंत्रिमंडल का विस्तार जल्द हो जाएगा। 


शनिवार को मुख्यमंत्री निवास पर बैठकों का दौर चला और बकवासों की बरसात हुई और अभी भी जारी है। लेकिन अब तक भी फैसला नही हो पाया है। 
माना जा रहा है कि सचिन पायलेट अपने करीबी लोगों को मंत्रिमंडल में अच्छि जगह दिलवाने चाहते है, तो वहीं गहलोत को केंद्रीय नेतृत्व प्रदेश में फ्रि हैंड छोड़ना चाहता है। 
वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है यह पूरा मामला सचिन पायलेट और भाजपा का है इसमें केंद्रीय नेतृत्व या राज्य के नेतृत्व का कोई लेना देना नही है।
विश्लेषकों का कहना है कि कांग्रेस की सरकार को गिराने के लिए भाजपा नेतृत्व ने क्या वादे किए विधायकों से, यह उसी का नतीजा है। भाजपा पार्टी को वो वादे पूरे करने में देरी हो रही है। इसलिए ये सब इतना लंबा चल रहा है। यह भी कहा जा रहा है कि भाजपा राज्य के नेतृत्व और नेताओं का सरकार गिराने की पंचायत में कोई ज्यादा योगदान नहीं है। इसलिए हर बात केंद्रीय नेतृत्व के ज़रिये ही हो रही है।


वहीं कुछ राजनीतिक विश्लेषक इससे सहमत नहीं हैं। उनका कहना है कि इस पूरे मामले से सचिन पायलेट और भाजपा का कुछ भी लेना देना नहीं है।
उनका कहना है कि यह मामला पूरी तरह से गहलोत और कांग्रेस के अंदर का है। कांग्रेस नेतृत्व चाहता है कि किसी भी तरह से पार्टी के अंदर असंतोष पैदा न हो इसलिए वो हर तरह से मंत्रिमंडल विस्तार से पहले संतुष्ट होना चाहते है।


लेकिन इस सब ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की छवि पर भी प्रश्न पैदा किये है। प्रदेश के मुख्यमंत्री बने गहलोत ने शपथ लेते वक़्त यह नहीं सोचा होगा कि उन्हें ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ेगा। इस तरह की घटना और स्थिति से पार्टी कमज़ोर भी होती है और जनता के बीच अच्छा संदेश भी नहीं जाता है जिसका असर ज़रुर होगा।
वहीं वागड़ के गांधी की छवी वाले अशोक गहलोत सचिन पायलेट के सामने कमजोर नजर आते है। ये बात गहलोत के बयानो में आसानी से देखी और पढ़ी जा सकती है।
लेकिन जो मामला चल रहा है उसकी वजह से पार्टी के अन्य नेताओं में भी असंतोष उभर कर सामने आ रहा है। वहीं ये डर भी है कि कांग्रेस का आम कार्यकर्ता अपने नेता की बेइज़्जती से नाराज़ न हो जाए। वही इस पूरे मामले ने भाजपा को भी बोलने का मौका दे दिया है।