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पितृपक्ष के सपनों का राज, सपनों मे क्या कहते है पूर्वज 
September 15, 2020 • छोटा अखबार • धर्म

पितृपक्ष के सपनों का राज, सपनों मे क्या कहते है पूर्वज 

छोटा अखबार।
पितृपक्ष का हिंदू धर्म में विशेष महत्व होता है। पितृपक्ष में अपने पूर्वजों को याद करने, उनके प्रति श्रद्धा का भाव रखने और तर्पण करने का समय होता है। पितृपक्ष 16 दिनों तक चलता है। अभी पितृपक्ष चल रहें और 17 सितंबर को सर्वपितृ अमावस्या के दिन इसका समापन होगा। मान्यता है कि श्राद्ध पक्ष के दौरान पितरों को दिया गया भोजन और तर्पण उनको जरूर पहुंचता है। पितृपक्ष में पितर देव ब्राह्राण और पशु पक्षियों के रूप में अपने परिजनों के द्वारा दिए गए अर्पण को स्वीकार कर उन्हें आशीर्वाद देते हैं। पितृपक्ष में पितरों का तर्पण जरूर करना चाहिए नहीं तो पितृदोष लगता है। मान्यता है कि पितृपक्ष के दौरान पूर्वज अपने परिजनों के सपने में आकर कुछ खास संकेत देते हैं।

सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार अगर पितृपक्ष के दौरान किसी के सपने में कोई पूर्वज या मृत परिजन धरती पर मौजूद अपने परिवार के सदस्यों संग वार्तालाप करता है तो इसका संकेत वह आने वाले समय में आपके साथ होने वाली किसी अनहोने के बारे में संकेत देते हैं।

पितृपक्ष के दौरान अगर सपने में कोई पूर्वज हंसते हुए आपके आस पास दिखाई देता तो समझिए वह आपसे काफी खुश हैं। सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार इस तरह के सपने बहुत ही शुभ होते हैं। यह इस बात की तरफ इशारा करता है कि आपके ऊपर पितरों का आशीर्वाद है।

अगर किसी व्यक्ति के सपने में पूर्वज मिठाई बांटते और खाते हुए दिखाई दे तो यह इस बात का संकेत है कि जल्द ही आपके जीवन में कोई खुशियां दस्तक देने वाली है।

वहीं अगर सपने में कोई पितर नाराज या दुखी दिखाई दे तो इसका मतलब आपके पूर्वज आपसे दुखी हैं। यह पितृदोष की निशानी है। पितृदोष से छुटकारा पाने के लिए पितृपक्ष में पितरों को तर्पण जरूर करना चाहिए।