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मणिपाल हॉस्पिटल में तीन दुर्लभ सफल असंगत किडनी प्रत्यारोपण किये 
February 8, 2020 • छोटा अखबार • राज्य

मणिपाल हॉस्पिटल में तीन दुर्लभ सफल असंगत किडनी प्रत्यारोपण किये 

छोटा अखबार।
मणिपाल हॉस्पिटल जयपुर ने, 18 वर्षीय रवि सोनी और 39 वर्षीय श्रीमती राजबाला, 52 वर्षीय आदित्य (बदला हुआ नाम) को नया जीवन प्रदान किया यह संभव हो पाया एक दुर्लभ और अद्वितीय असंगत किडनी प्रत्यारोपण के द्वारा । यद्यपि असंगत किडनी प्रत्यारोपण की दुनिया भर में लोकप्रियता बढ़ रही है, हालांकि विकासशील देशों की अपनी सीमाएं हैं जैसे कि उच्च लागत, एंटीबॉडी-मध्यस्थता अंग अस्वीकृति का जोखिम और पोस्ट-प्रत्यारोपण संक्रमणों का बढना। ये प्रत्यारोपण जटिल थे क्योंकि

प्राप्तकर्ताओं और दाताओं के बीच रक्त समूह बेमेल थे। इन सभी बाधाओं के बावजूद, मणिपाल हॉस्पिटल जयपुर की किडनी ट्रांसप्लांट टीम ने तीन सफल असंगत किडनी ट्रांसप्लांट किए। वर्तमान में सभी मरीज सामान्य किडनी फंक्शन के साथ सक्रिय व स्वस्थ जीवन जी रहे हैं। इस मामले में दाता का रक्त समूह AB+ था और प्राप्तकर्ता का रक्त समूह B+ था। सभी मरीज गंभीर रुप से किडनी की समस्या से पीड़ित थे और गुर्दा प्रत्यारोपण ही उनके लिए उपचार का अंतिम विकल्प था। इन दुर्लभ किडनी प्रत्यारोपणों के बारे में बताते हुये डॉ. जितेंद्र गोस्वामी और डॉ. आलोक पांडे, नेफ्रोलॉजिस्ट, मणिपाल हॉस्पिटल जयपुर ने बताया की "किडनी ट्रांसप्लांटेशन एंड-स्टेज रीनल डिजीज (ESRD) के रोगियों के लिए रीनल रिप्लेसमेंट थेरेपी (RRT) का सबसे अच्छा रूप है। ईएसआरडी के केवल 10 प्रतिशत रोगी ही भारत में रीनल रिप्लेसमेंट थेरेपी (RRT) करवा पाते है। मात्र 2 प्रतिशत रोगी ही गुर्दा प्रत्यारोपण करवा पाते है और लगभग 35 प्रतिशत किडनी दाताओं का ब्लडग्रुप का मिलान नहीं होने के कारण ट्रांसप्लांट नहीं हो पाता है। 
डॉ. रवि सी दारा, इम्यूनोलॉजिस्ट मणिपाल हॉस्पिटल जयपुर ने कहा की एंटीबॉडी को हटाने के लिए, हम विशेष इंजेक्शन (रिटक्सिमैब) देते हैं और हम कैसकेड प्लाज्मा एक्सचेंज (डबल फिल्ट्रेशन प्लाज्मा एक्सचेंज) करते हैं, जो की रक्त को फिल्टर करने की एक प्रक्रिया है जो रक्त में से हानिकारक एंटीबॉडीज को निकालती है।