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53.29 प्रतिशत सरकारी, बीपीसीएल की बिक्री को मंजूरी
February 4, 2020 • छोटा अखबार • देश - विदेश

53.29 प्रतिशत सरकारी, बीपीसीएल की बिक्री को मंजूरी

छोटा अखबार।
देश भर में 15,078 पेट्रोल पंप और 6,004 एलपीजी वितरक वाली बीपीसीएल के निजीकरण के लिए अगले कुछ दिन के भीतर ही बोली लगाने के लिए रुचि पत्र आमंत्रित करने की प्रक्रिया शुरू कर सकती है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पिछले साल नवंबर में पेट्रोलियम विपणन एवं रिफाइनि कंपनी बीपीसीएल की रणनीतिक बिक्री को मंजूरी दे दी थी। सरकार की इस कंपनी में इस समय 53.29 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

चर्तमान बाजार कीमत के अनुसार रणनीतिक बिक्री से 60 हजार करोड़ रुपये प्राप्त हो सकते हैंं निवेशकों के लिए बीपीसीएल के बारे में पिछले साल दिसंबर में अमेरिका, लंदन और दुबई में प्रचार अभियान चलाया गया। देश में मुंबई, कोच्चि, बीना, नुमालीगढ़ सहित बीपीसीएल की चार रिफाइनरियां हैं। बीपीसीएल की बिक्री को मंजूरी देते समय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि नुमालीगढ़ रिफाइनरी को बीपीसीएल के नियंत्रण से बाहर कर सरकार पेट्रोलियम कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बेचेगी।
वित्त मंत्री ने यह भी बताया था कि मंत्रिमंडल ने प्रबंधन नियंत्रण अपने पास रखते हुए चुनिंदा सार्वजनिक उपक्रमों में सरकार की हिस्सेदारी 51 प्रतिशत से नीचे लाने को भी मंजूरी दी है।
उन्होंने कहा कि बीपीसीएल के निजीकरण से पहले नुमालीगढ़ रिफाइनरी को उससे अलग किया जाएगा और किसी दूसरी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी द्वारा इसका अधिग्रहण किया जायेगा। निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग के सचिव तुहीन कांत पांडे ने कहा कि हमें (बीपीसीएल के रोड शो) काफी अच्छी प्रतिक्रिया मिली। हम इसके लिए जल्द ही रुचि पत्र जारी करेंगे। उसके बाद निवेशक औपचारिक प्रक्रिया के जरिये हमसे जुड़ जायेंगे। बीपीसीएल के लिए रुचि पत्र कुछ ही दिनों में जारी कर दिया जायेगा।


बतादे कि नवंबर 2019 में उस समय बीपीसीएल के प्रस्तावित विनिवेश पर कांग्रेस के हीबी इडन ने लोकसभा में इस तरह के फैसले को देशहित के लिए नुकसानदेह बताते हुए सरकार से इस पर पुनर्विचार की मांग की थी।
वहीं सरकारी पेट्रोलियम कंपनियों के कर्मचारी संगठनों ने बीपीसीएल के रणनीतिक विनिवेश का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि इस विनिवेश से सरकार को एक बारगी राजस्व की प्राप्ति तो हो सकती है लेकिन इसका दीर्घकाल में बड़ा नुकसान होगा। पहले अधिकारियों ने कहा था कि कंपनी को कौड़ियों के दाम में बेचा जा रहा है और केंद्र सरकार द्वारा इसका निजीकरण देश के लिए आत्मघाती साबित होगा।
जानकारी के लिये बतादें कि बीपीसीएल को निजी या विदेशी कंपनियों को बेचने के लिए सरकार को संसद की अनुमति लेने की जरूरत नहीं होगी क्योंकि सरकार ने बीपीसीएल के राष्ट्रीकरण संबंधी कानून को 2016 में रद्द कर दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर, 2003 में व्यवस्था दी थी कि बीपीसीएल और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लि. (एचपीसीएल) का निजीकरण संसद द्वारा कानून के संशोधन के जरिये ही किया जा सकता है। संसद में पूर्व में कानून पारित कर इन दोनों कंपनियों का राष्ट्रीयकरण किया गया था। 
अक्टूबर में प्रकाशित समाचारों के अनुसार एक जापानी स्टॉकब्रोकर नोमुरा रिसर्च की मानें तो बीपीसीएल में सरकार की 53.3 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने के लिए मुकेश अंबानी के स्वामित्व वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) बोली लगा सकते हैं। निवेशकों को भेजे गए नोट में नोमुरा ने कहा था कि उन्हें लगता है कि सरकार का यह कदम केवल औपचारिकता पूरी करने की कवायद भर है। नोमुरा ने कहा कि रिलायंस रिफाइनिंग या केमिकल में भले ही अपनी हिस्से कम करना चाहती हो लेकिन वह बीपीसीएल में अपनी हिस्सेदारी खरीदने के लिए बोली लगा सकती है।