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17 मार्च तक खरीद सकते है एयर इंडिया — भारत सरकार
January 30, 2020 • छोटा अखबार • देश - विदेश

17 मार्च तक खरीद सकते है एयर इंडिया — भारत सरकार

छोटा अखबार।
केंद्र सरकार ने 27 जनवरी को कर्ज से दबी एयर इंडिया के 100 प्रतिशत शेयर बेचने की घोषणा कर दी है। जारी की गई निविदा के अनुसार एयर इंडिया के रणनीतिक विनिवेश के तहत सरकार कंपनी की सस्ती विमानन सेवा एयर इंडिया एक्सप्रेस में भी 100 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचेगी। इस मामले को ध्यान में रखते हुए भारतीय मजदूर संध (बीएमएस) ने केन्द्र सरकार से एयर इंडिया को बेचने का विरोध करते हुए सरकार से फैसले पर फिर से विचार करने का आग्रह किया है। कहा है कि भारत में शायद ये एकमात्र ऐसे उद्यम हैं, जो औद्योगिक नीति प्रस्ताव 1956 के अनुसार निर्धारित सभी उद्देश्यों को पूरा करते हैं और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां अपनी स्थापना के समय से ही वृद्धि और मूल्य सृजन में अग्रणी भूमिका निभाती रही हैं। 

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े भारतीय मजदूर संघ ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सामाजिक व्यय के लिए धन जुटाने के नाम पर सार्वजनिक कंपनियों को बेचा जा रहा है।सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) को निजी कंपनियों को बेचने से सरकार को संसाधन जुटाने और सामाजिक व्यय के वित्तपोषण करने में मदद नहीं मिलेगी। क्योंकि निजीकरण करने से सरकार अपनी जिम्मेदारियों से मुक्त नहीं हो सकती।


संघ ने कहा है कि एयर इंडिया के निजीकरण से कई हवाई अड्डों को संकट का सामना करना पड़ा सकता है और कई शहरों में कनेक्टिविटी की समस्या आ सकती है। बीएमएस ने आग्रह किया कि इन मुद्दों को ध्यान में रखते हुए सरकार को एयर इंडिया के विनिवेश से पहले सौ बार सोच लेना चाहिए।


एयर इंडिया के सिंगापुर एयरलाइंस के साथ संयुक्त उपक्रम एयर इंडिया-सैट्स एयरपोर्ट सर्विसेस प्राइवेट लिमिटेड की 50 प्रतिशत हिस्सेदारी बेची जाएगी। एआईसैट्स हवाई अड्डों पर विमानों के खड़े होने और रखरखाव इत्यादि की सेवाएं देती है। सरकार ने इस विनिवेश में बोली प्रक्रिया का इस्तेमाल करेगी और 17 मार्च तक एयर इंडिया खरीदने के इच्छुक पक्षों से रुचि पत्र मांगे हैं। दो साल से भी कम अवधि में एयर इंडिया को बेचने की यह सरकार की दूसरी कोशिश है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पिछली बार सरकार का यह प्रयास असफल रहा था। साल 2018 में सरकार ने एयर इंडिया की 76 प्रतिशत इक्विटी शेयर पूंजी को बंद करने के साथ-साथ निजी कंपनियों को प्रबंधन नियंत्रण स्थानांतरित करने का प्रस्ताव दिया था। हालांकि किसी ने बोली नहीं लगाई थी।